दुबई/इस्लामाबाद, अगस्त 22 (TNA) गल्फ देशों ने 1 मार्च से 13 जुलाई के बीच 20,000 से अधिक पाकिस्तानी नागरिकों को निर्वासित किया है, जिनमें सबसे ज्यादा मामले सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से जुड़े हैं। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में पेश आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, यह कार्रवाई सुरक्षा चिंताओं, अवैध प्रवेश, वीजा उल्लंघन, अपराध से जुड़े मामलों और कुछ मामलों में भीख मांगने जैसे कारणों के आधार पर की गई।
मुख्य आंकड़े
- सऊदी अरब ने सबसे ज्यादा 15,500 पाकिस्तानी नागरिकों को देश से निकाला, जबकि यूएई से 3,803 लोगों का निर्वासन हुआ।
- अन्य खाड़ी देशों में ओमान ने 1,606, बहरीन ने 521, कतर ने 429 और कुवैत ने 97 पाकिस्तानी नागरिकों को निर्वासित किया।
किन कारणों से कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार, निर्वासन की वजहों में अवैध प्रवेश, निर्धारित अवधि से अधिक रुकना, भीख मांगना, नशीले पदार्थों से जुड़े अपराध, सुरक्षा चिंताएं और गलत या फर्जी दस्तावेज शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 4,628 लोग ऐसे थे जो देश छोड़कर फरार थे, 1,294 लोग पहले जेल में रह चुके थे, 968 लोगों को ब्लैकलिस्ट किया गया था, 1,155 मामलों में पासपोर्ट खोने की बात सामने आई और 689 लोगों को वीजा उल्लंघन के कारण निकाला गया।
सुरक्षा से जुड़े मामले
आंकड़ों में ऐसे मामले भी शामिल हैं, जिनमें कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को ईरान-अमेरिका संघर्ष से जुड़ी तस्वीरें या वीडियो अपने शहरों से रिकॉर्ड करने या साझा करने के आरोप में हिरासत या निर्वासन का सामना करना पड़ा। इससे पता चलता है कि यह पूरी कार्रवाई सिर्फ आव्रजन नियमों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके पीछे सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी चिंता भी शामिल थी।
सरकार की सफाई
पाकिस्तान के संसदीय मामलों के मंत्री डॉ. तारिक फजल चौधरी ने संसद को बताया कि यह आंकड़ा खाड़ी देशों से लौटने वाले हर पाकिस्तानी को नहीं दर्शाता। उनके मुताबिक, इसमें सिर्फ वही लोग शामिल हैं जिन्हें आधिकारिक तौर पर हिरासत में लेकर निर्वासित किया गया और जिनके लिए पाकिस्तानी मिशनों ने आपातकालीन यात्रा दस्तावेज जारी किए। स्वेच्छा से लौटने वाले या वैध पासपोर्ट पर वापस आने वाले नागरिक इस गणना में शामिल नहीं हैं।