लखनऊ, अक्टूबर 1 (TNA) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2015 में ‘विकलांग’ शब्द के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द का प्रयोग शुरू किया। यह केवल शब्द परिवर्तन नहीं, बल्कि दृष्टिकोण में परिवर्तन का परिचायक था। दिव्यांगजनों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और सम्मान आवश्यक है। सरकार दिव्यांगजनों के साथ मजबूती से खड़ी है। उनके मार्ग की बाधाएं दूर करने और उन्हें सशक्त एवं स्वावलम्बी बनाने के लिए निरन्तर कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री गोरखपुर में प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन में सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सेवा संकल्प अभियान के अन्तर्गत दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर 509 दिव्यांगजन को विभिन्न प्रकार के 664 सहायक उपकरण वितरित किये गये। इनमें 127 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, 25 ई-ट्राईसाइकिल, 70 ट्राईसाइकिल, 310 स्मार्ट केन एवं ब्रेल किट, 90 हियरिंग एड, 05 स्मार्टफोन, 01 ब्रेल गीता, 01 ब्रेल लिपि में रामचरितमानस, 10 कृत्रिम अंग एवं उपकरण से जुड़े अन्य उपकरण, 20 वयोश्री और 05 पाठ्य पुस्तकें शामिल हैं। कार्यक्रम दिव्यांगजन सशक्तिकरण पर आधारित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गयी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पहले गुजरात और अब देश विकास की नई ऊँचाइयां प्राप्त कर रहा है। किसी भी समाज की वास्तविक पहचान उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अन्तिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक कितनी सहजता और मजबूती से पहुंच रहा है। बिना भेदभाव योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान तक पहुंचाना सुशासन का पहला सूत्र है। उत्तर प्रदेश शासन एवं हिन्दुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में दिव्यांगजनों को वितरित किए जा रहे उपकरण उनके सपनों को नई उड़ान देने का प्रयास हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विगत 12 वर्षों में शासन की योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचा है। व्यक्ति, जाति, मत, मजहब, क्षेत्र और भाषा किसी के लिए बाधक नहीं बने। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। जब सबका विकास होता है, तब सबका विश्वास भी सरकार में बढ़ता है। सभी के विकास के लिए हम सभी को सामूहिक रूप से प्रयास करना चाहिए। आज इसी क्रम में दिव्यांगजनों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि इतिहास साक्षी है कि परिवार और समाज का सहयोग मिले, तो शारीरिक चुनौतियां प्रतिभा की राह में बाधक नहीं बन सकती। ऋषि अष्टावक्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राजा जनक की सभा में उनके शरीर को देखकर विद्वानों के हंसने पर अष्टावक्र ने स्पष्ट किया कि व्यक्ति का मूल्यांकन उसके ज्ञान और आत्मबोध से होना चाहिए, शरीर से नहीं।
महाकवि सूरदास ने दृष्टिबाधित होने के बावजूद भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और ब्रज संस्कृति को जिस सौन्दर्य के साथ अभिव्यक्त किया, वह उनकी अद्भुत प्रतिभा का प्रमाण है। रामायण धारावाहिक के संगीतकार रविन्द्र जैन भी दृष्टिबाधित थे, लेकिन उनकी प्रतिभा और संगीत ने उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाई। इससे स्पष्ट है कि स्थूल चक्षुओं की सीमाएं हो सकती हैं, लेकिन आत्मा, बुद्धि और विवेक की सीमाएं असीमित हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि टोक्यो पैरालम्पिक में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि पदक केवल मजबूत भुजाओं से नहीं, मजबूत हौसलों से जीते जाते हैं। अरुणिमा सिन्हा ने अपना पैर खोने के बाद भी कृत्रिम पैर के सहारे एवरेस्ट की ऊंचाईयों को फतह किया था। दीपा मलिक, देवेन्द्र झाझरिया, मरियप्पन थंगावेलू, सुमित अन्तिल, अवनी लेखरा, भावना पटेल और मानसी जोशी जैसी पैरा खिलाड़ियों ने दुनिया में खेलों में प्रदेश का नाम रोशन किया है।
योगी ने कहा कि प्रदेश के पैरा खिलाड़ियों में चेस खिलाड़ी वैभव गौतम, हाई जम्पर प्रवीण कुमार, प्रीति पाल तथा प्रदेश सरकार में सचिव व बैडमिण्टन खिलाड़ी सुहास एल0वाई0 सहित अन्य खिलाड़ियों ने भी शारीरिक चुनौती के बावजूद अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। इन खिलाड़ियों ने साबित किया है कि प्रतिभा को दया नहीं, अवसर चाहिए। उचित साधन, प्रशिक्षण, परिवार एवं समाज का सहयोग और व्यवस्था द्वारा मार्ग की बाधाएं दूर होने पर प्रतिभा अपनी ऊंचाई तक पहुंच सकती है।
डबल इंजन की सरकार दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और स्वावलम्बन के लिए प्रतिबद्ध है। दिव्यांगजन पेंशन पहले 300 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये और फिर 1,000 रुपये की गई तथा इसमें शीघ्र ही और वृद्धि की जाएगी। सरकार का प्रयास है कि घर से सड़क, सड़क से परिवहन, परिवहन से स्कूल, स्कूल से कॉलेज और कॉलेज से रोजगार तक दिव्यांगजनों के लिए प्रत्येक मार्ग सुगम हो। दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए ब्रेल, ऑडियो सूचना, स्पर्श पथ, पीली स्पर्श पट्टी और सुगम डिजिटल सेवाएं, श्रवण बाधित व्यक्तियों के लिए साइन लैंग्वेज, कैप्शन और विजुअल अलर्ट तथा बौद्धिक अथवा अन्य सहायता की आवश्यकता वाले व्यक्तियों के लिए सरल भाषा, स्पष्ट संकेत और प्रशिक्षण सहायता की व्यवस्था पर सरकार कार्य कर रही है।