सीतापुर, सितंबर 27 (TNA) खबर आई है कि जनपद में भारी बारिश, जलभराव और आंधी-तूफान के कारण स्कूलों के प्रांगण और कक्षाएं गंदी हो गई हैं। जी हाँ, आपने सही पढ़ा। बारिश हुई तो गंदगी हुई। इस अभूतपूर्व खोज के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. गोरखनाथ पटेल ने रविवार को कार्यालय आदेश जारी कर दिया।
आदेश की भाषा भी कमाल की है: प्रांगण और कक्षाएं "गंदी हो गई होंगी।" यानी "होंगी।" मतलब अभी किसी ने देखा नहीं, पर अंदाज़ा पक्का है। कहते हैं अनुभव बड़ी चीज़ होती है।
समय-सारिणी का नया गणित
28 सितंबर को स्कूल सुबह 8:00 बजे "पूर्व की भांति" खुलेगा, लेकिन बच्चों को 9:30 बजे बुलाया जाएगा। यानी डेढ़ घंटे में सफ़ाई का चमत्कार होगा। बच्चे घर पर नाश्ता करें, स्कूल में मास्टर साहब झाड़ू थामें।
करने को क्या-क्या है, ज़रा सूची देखिए
- गिरे हुए पेड़ों को "व्यवस्थित" कराइए। पेड़ गिरा है, उसे सलीके से रखिए। शायद खूबसूरती से सजा दें तो और अच्छा।
- प्रांगण और कक्षाओं की सफ़ाई कराइए, जलभराव निपटाइए, और यह भी देखिए कि कहीं जहरीले जीव-जंतु तो नहीं बैठे। सुबह-सुबह सर्प-दर्शन का भी बंदोबस्त रखिए।
- रसोईघर की सफ़ाई कराइए, क्योंकि मिड-डे मील की उम्मीद तो रहती ही है।
- गाँव के तैनात सफ़ाईकर्मी की मदद से शौचालय और पूरे विद्यालय को चमकाइए।

पैसा कहाँ से आएगा? कंपोजिट ग्रांट से, और कहाँ से
सारा खर्च कंपोजिट ग्रांट मद से होगा, यानी पहले से तय बजट में सफ़ाई भी, मरम्मत भी, और शायद पेड़ों की "व्यवस्था" भी। कंपोजिट ग्रांट तो वैसे भी सब जगह काम आने वाला जादुई पिटारा है।
सिर्फ़ एक दिन का इंतज़ाम
आदेश साफ़ कहता है कि यह व्यवस्था केवल 28 सितंबर के लिए है। उसके बाद स्कूल पुराने समय पर चलेंगे। यानी जो सफ़ाई एक दिन में हो जाएगी, उसका रिकॉर्ड अगले दिन तक तो सुरक्षित रहेगा ही।
निगरानी की चेन
आदेश की प्रतिलिपि महानिदेशक स्कूल शिक्षा से लेकर जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, शिक्षा निदेशक, सचिव बेसिक शिक्षा परिषद और डायट खैराबाद तक भेजी गई है। कुल ग्यारह जगह। खंड शिक्षा अधिकारियों से "शत-प्रतिशत अनुपालन" की उम्मीद है। जिला पंचायत राज अधिकारी से भी गुज़ारिश है कि सफ़ाईकर्मियों को स्कूलों की तरफ़ रुख कराएं।
ग्यारह विभागों को सूचना और एक झाड़ू, बस यही है सीतापुर की सुबह की तैयारी।