उज़्बेकिस्तान, अगस्त 28 (TNA) उज़्बेकिस्तान में हिंदी भाषा सीखने के प्रति लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है। इंडोलॉजिस्ट बायोत रखमतोव ने डीडी न्यूज से बातचीत में हिंदी के प्रसार और इसके अध्ययन से जुड़ी जानकारी साझा की। रखमतोव के अनुसार, उज़्बेकिस्तान में हिंदी पढ़ाने का सिलसिला वर्ष 1947 में भारत की स्वतंत्रता के साथ शुरू हुआ। उस समय ताशकंद के चार स्कूलों में हिंदी की पढ़ाई शुरू की गई थी।
उन्होंने बताया कि ताशकंद के लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर स्थित स्कूल नंबर 24 में आज भी हिंदी की पढ़ाई नियमित रूप से होती है। रखमतोव के मुताबिक, शुरुआती दौर में भाषा विज्ञान विभाग में करीब 50 छात्र हिंदी सीखते थे। ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज़ के गठन के बाद हिंदी की पढ़ाई का दायरा बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि अब भाषा संकाय के अलावा दर्शनशास्त्र, फिलोलॉजी और इतिहास तथा पत्रकारिता विभाग के छात्र भी हिंदी सीख रहे हैं। रखमतोव के अनुसार, यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज़ में 250 से अधिक छात्र हिंदी सीख रहे हैं। स्कूलों के छात्रों को शामिल करने पर यह संख्या 1,000 से अधिक हो जाती है। उन्होंने बताया कि ताशकंद और आसपास के क्षेत्रों में कुल मिलाकर करीब 1,500 से 2,000 लोग सक्रिय रूप से हिंदी सीख रहे हैं।
रखमतोव ने कहा कि भाषा और संस्कृति के आदान-प्रदान से भारत और उज़्बेकिस्तान के लोगों के बीच संबंध मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि हिंदी के साथ-साथ उज़्बेकिस्तान में योग के नए केंद्र भी स्थापित हो रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच जन-दर-जन संपर्क को बढ़ावा मिल रहा है।