धनराज परिमल नाथवानी को राज्यसभा सीट का दावेदार बनाते ही सपा मुखिया अखिलेश यादव सवालों के घेरे में आ गए हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट और अंबानी परिवार के बेहद करीबी धनराज के पिता एनडीए समर्थित सांसद के रूप में चौथी बार राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
धनराज परिमल को सपा द्वारा राज्यसभा भेजने के फैसले पर सवाल ही नहीं उठ रहे बल्कि ये शंकाएं भी तेज हो गईं हैं कि क्या सपा यूपी के आगामी विधानसभा में कांग्रेस के साथ चुनाव नहीं लड़ेगी !
यदि सपा-कांग्रेस साथ चुनाव लड़ेगी तो सबसे बड़ा प्रश्न यही उठेगा कि कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी का तकिया कलाम अडानी-अंबानी का विरोध रहा है। उनका मानना है कि इन उद्योग घरानों के इशारे पर गरीबों, वंचितों, पिछड़ों, किसानों और नौजवान विरोधी भाजपा सरकार चल रही है।
ऐसे में कांग्रेस की साथी सपा अंबानी ग्रुप के धनराज परिमल नाथवानी को राज्यसभा कैसे भेज सकती है।
सवाल ये भी बड़ा है कि सामंतवाद,पूंजिवाद के विरुद्ध समाजवादी विचारधारा में पूंजीपतियों को सबसे बड़े सदन में भेजने की जरुरत क्यों पड़ी ?
इससे पहले खबरें चल रहीं थी कि समाजवादी पार्टी राम गोपाल यादव और आलोक रंजन को राज्यसभा भेजेगी। और तीसरी दावेदारी मे जोड़-तोड़ की कोशिश कर मुस्लिम समुदाय के सलीम शेरवानी को जिताने का जटिल प्रयास किया जाएगा।
लेकिन एकाएकी अंबानी परिवार के खासमखास और रिलायंस इंडस्ट्री के ग्रुप प्रेसिडेंट द्वारा पर्चा दाखिल करने के बाद सोशल मीडिया पर सपा के सबसे बड़े वोट बैंक मुस्लिम समाज के तेवरों में भी बल दिखने लगे हैं। जिससे संबंधित दो लाइन का एक व्यंग्य भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है:
अंबानी का नाथवानी राज्यसभा जाएगा,
सलीम शेरवानी पहन के दरी बिछाएगा
दूसरी तरफ समाजवादी नाथवानी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाने को एक बड़ा राजनीतिक दांव बता रहे हैं। दावे किए जा रहे हैं कि अखिलेश यादव तीसरी दावेदारी और उसकी जीत की गणित तय कर चुके हैं। सपा समर्थक दावे कर रहे हैं कि खेला हो गया है,राजभर, निषाद, आर एल डी और कुछेक भाजपा विधायकों का समर्थन सपा की तीसरी जीत जितवा सकती है।
-- नवेद शिकोह