भाजपा के लिए धर्म और 'पार्टी धर्म' दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। भाजपाई अपनी पार्टी को सनातन धर्म का रक्षक मानते हैं और ये भी सच है कि सनातन आस्था की चेतना से भाजपा आगे बढ़ती है। इसलिए ही धार्मिक अनुष्ठानों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला ब्राह्मण समाज भाजपा की जड़ों से जुड़ा रहा है।
वक्त बदला, स्थितियां-परिस्थितियां बदली और राजनीति के साथ सत्ता में पैर जमाने के लिए भाजपा ने सवर्ण वर्ग के साथ सभी जातियों का विश्वास हासिल किया। अगड़ी-पिछड़ी जातियों की एकजुटता से हिंदुत्व का गुलदस्ता सजाया। और देखते ही देखते अपने कमंडल में मंडल को भी सम्मिलित कर लिया।
भाजपा की इस सफलता को उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के पीडीए ने चुनौती दे डाली है। बसपा की ढलान और कांग्रेस का साथ पाकर सपा ने समाजवाद के साथ अंबेडकरवाद का अघोषित गठबंधन कर नीली बिग्रेड तैयार कर दलित वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिशें तेज कर दी हैं।
सबका साथ,सबका विकास और सबका विश्वास हासिल करने के लिए जातियों का संतुलन बनाना इस वक्त भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती है।
बड़ी तादाद वाले पिछड़े-दलित वर्ग के साथ-विश्वास की शाखाएं भी हरी-भरी रहें और सवर्ण समाज की जड़ों को भी खाद-पानी मिलता रहे,ऐसी कोशिशों में संगठन और योगी सरकार दोनों ही जुट गए हैं। जातियों की विपक्षी राजनीति हावी न हो इसलिए विधानसभा चुनाव 2027 से पूर्व महिलाओं,छात्राओं के लिए लाभार्थी योजनाएं भी लागू होने जा रही हैं।
सरकारी फैसले और योजनाओं के जरिए जातिगत संतुलन भी साधने की हर संभव कोशिशों के साथ विभिन्न जातियों के नेताओं को अपने समाज का विश्वास कायम रखने की जिम्मेदारी बांट दी गई है। योगी सरकार के खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति मंत्री मनोज पांडेय सवर्ण समाज के साथ पार्टी की हिन्दुत्व की जमीन में खाद-पानी देने की जिम्मेदारी निभा रहे है। सत्तारूढ़ पार्टियों से लेकर विपक्षी दलों की सक्रियता में यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियां साफ नजर आ रही हैं।
इन दिनों नेहरू परिवार के गढ़ रहे रायबरेली में हिन्दुत्व की अलख रौशन है। ऊंचाहार रायबरेली में योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय द्वारा आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा 11 सितंबर से शुरू होकर 17 सितंबर तक चलेगा। इस भव्य और दिव्य आयोजन में भीड़ के जुटान को कोई हिन्दुत्व की एकता या सनातन चेतना की बानगी कह रहा है तो कोई इसे ब्राह्मण समाज को आकर्षित करने वाला आयोजन बता रहा है। योगी सरकार और मोदी सरकार के तमाम मंत्रियों की उपस्थिति वाले इस धार्मिक आयोजन को दिल्ली और लखनऊ की एकता का आध्यात्मिक सेतु का प्रतीक भी माना जा रहा है।
इस आयोजन को ब्राह्मण जुटान भी कहा जा रहा है। प्रबुद्ध वर्ग भाजपा से छिटके नहीं इसलिए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से लेकर मनोज पांडेय जैसे तमाम सवर्ण नेता अपने समाज से कनेक्ट होते दिख रहे हैं। उच्य पदस्थ सूत्रों का कहना हैं कि सवर्ण नेताओं खासकर ब्राह्मण नेताओं को ये जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने समाज से कनेक्ट हों। मान सम्मान दें, गिले शिकवे दूर करें और ब्राह्मण जुटान के लिए सामाजिक-धार्मिक आयोजन करें।
विधानसभा चुनाव की आहट से ही उत्तर प्रदेश में जातियों की गोलबंदी शुरू हो गई है। कभी समाजवादी पार्टी का ब्राह्मण चेहरा कहलाने वाले मनोज पांडेय जैसे तमाम नेता-मंत्री भाजपा में जातीय संतुलन टीम का हिस्सा बनकर अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
बताया जाता है कि मनोज पांडेय के सामने दोहरी जिम्मेदारी है।भाजपा से ब्राह्मण न खिसके, जनता में हिन्दुत्व की अलख का अहसास होता रहे।
यूजीसी या एक दशक की सत्ता में किन्हीं दूसरे कारणों से यदि प्रबुद्ध समाज में कोई नाराजगी है तो उसे दूर करने की जिम्मेदारी। मनोज पांडेय की जिम्मेदारी अधिक होने का कारण है कि उन्हें भाजपा से जुड़े ब्राह्मण समाज को तो साधना ही है,अपने पुराने घर सपा में भी ताक झाक करनी है। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो मनोज पांडेय समाजवादी पार्टी के ब्राह्मण पदाधिकारियों, जन प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं तक के संपर्क मे हैं। ताकि पीडीए के तुष्टिकरण से अंदर ही अंदर भरे बैठे सपाई ब्राह्मणों के लिए वो भाजपा का द्वारा खोल दें।
फिलहाल सपा से बगावत का इनाम पाकर कैबिनेट मंत्री बनने के बाद मनोज पांडेय ने रायबरेली में शिव महापुराण कथा में श्रद्धालुओं की भारी संख्या जुटाकर अपने शक्ति प्रदर्शन की अच्छी शुरूआत की है।
-- नवेद शिकोह