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Pregnant woman writhes in labour pain in Mainpuri; allegations of a ₹5,000 demand for delivery

मैनपुरी में प्रसव पीड़ा से कराहती रही गर्भवती, डिलीवरी के नाम पर 5 हजार मांगने का आरोप, जांच टीम गठित
11 October 2026 by
thenewsagency


मैनपुरी, अक्टूबर 12 (TNA) सरकारी अस्पतालों में गरीबों को मुफ्त और बेहतर इलाज देने के दावों के बीच कुरावली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से सामने आए एक मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसव पीड़ा से परेशान गर्भवती महिला से डिलीवरी कराने के नाम पर पांच हजार रुपये मांगने, रुपये न देने पर गाली-गलौज करने और अस्पताल से बाहर निकालने का आरोप लगा है। 

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में है। सवाल यह है कि यदि सरकारी अस्पताल में भी प्रसव के लिए गरीब परिवार से कथित तौर पर रकम मांगी जाएगी, तो जरूरतमंद महिलाओं को मुफ्त इलाज की सुविधा आखिर कहां मिलेगी?

जानकारी के अनुसार कुरावली के वेदन टोला निवासी सुमन पत्नी स्वर्गीय जगदीश ने थाना कुरावली में दी तहरीर में बताया कि वह अपनी गर्भवती बेटी शिवानी को प्रसव पीड़ा होने पर सीएचसी लेकर पहुंची थीं। आरोप है कि उस समय मौजूद नर्स इंदु ने यह कहते हुए उन्हें वापस भेज दिया कि अभी बच्चे के जन्म का समय नहीं हुआ है। इसके बाद घर पर बेटी की हालत फिर बिगड़ गई।

प्रसव कराने के लिए मांगी रिश्वत

सुमन के मुताबिक, छह अक्टूबर की रात करीब नौ बजे वह बेटी को लेकर दोबारा अस्पताल पहुंचीं। आरोप है कि वहां मौजूद नर्स इंदु, गुड़िया और विनीता ने प्रसव कराने के नाम पर पांच हजार रुपये मांगे। आर्थिक तंगी का हवाला देकर असमर्थता जताने पर कथित तौर पर कहा गया कि यह पैसा अधीक्षक के पास जाता है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पीड़ित का दावा घटना सीसीटीवी में कैद

पीड़िता का आरोप है कि रुपये देने से इनकार करने पर उनकी प्रसव पीड़ा से परेशान बेटी को अस्पताल के गेट से बाहर निकाल दिया गया। विरोध करने पर गाली-गलौज की गई और मारपीट की धमकी दी गई। सुमन का दावा है कि अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना कैद है।

निजी अस्पताल में कराना पड़ा प्रसव, खर्च का बोझ भी बढ़ा

परिजनों के अनुसार, बेटी की हालत बिगड़ती देख सुमन ने डायल 112 पर फोन कर पुलिस को सूचना दी। बाद में शिवानी को प्रसव के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां इलाज पर काफी रुपये खर्च हुए। पीड़िता ने संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग की है।
अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल

मामले में अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही अहम है। क्या सीएचसी के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी? क्या कथित रूप से रकम मांगने और मरीज को बाहर निकालने के आरोपों की पड़ताल होगी? क्या उस रात ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों और अस्पताल के अभिलेखों की जांच होगी?

प्रसव जैसी संवेदनशील स्थिति में किसी महिला को समय पर चिकित्सा सहायता मिलना बेहद जरूरी है। ऐसे में आरोपों की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग से तत्काल जांच, पीड़िता के बयान दर्ज करने और दोष सिद्ध होने पर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की अपेक्षा है। फिलहाल, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि हम नहीं करते मामला जांच का विषय है।

मामले की जांच के लिए टीम गठित

मामले को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी आरसी गुप्ता से बात की गई तो उनके द्वारा बताया गया वायरल वीडियो का मामला उनके संज्ञान में है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नोडल सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम का गठन कर दिया गया है। जांच में जो भी तथ्य निकल कर सामने आएंगे उनके आधार पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

-- मनीष मिश्रा

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