मैनपुरी, नवंबर 8 (TNA) चार दिन पहले जिस महिला की गोद में नवजात बच्ची की किलकारी गूंजी थी, उसी प्रसूता के साथ निजी अस्पताल में मारपीट का गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप है कि डिस्चार्ज कराने और भुगतान को लेकर हुए विवाद में अस्पताल कर्मचारियों ने महिला और उसके पति के साथ अस्पताल के अंदर और मुख्य गेट पर मारपीट की।
बताया गया है कि चार दिन पूर्व प्रसव पीड़ा होने पर महिला को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसने सामान्य प्रसव से बच्ची को जन्म दिया। परिवार का आरोप है कि डिस्चार्ज के दौरान विवाद बढ़ा और अस्पताल स्टाफ ने उनके साथ मारपीट की। वहीं अस्पताल कर्मचारियों की दलील है कि भुगतान नहीं किया गया था और महिला बिना डिस्चार्ज कराए जा रही थी।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने का दावा किया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद कोतवाली पुलिस पीड़ित परिवार को लेकर पहुंची। प्रसूता और नवजात बच्ची की हालत गंभीर देखते हुए दोनों को सौ शैया महिला जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
सीएमओ ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया
मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि अभी तक उनके पास इस संबंध में कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि मामला संज्ञान में आने के बाद इसकी जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने मारपीट के मामले में पीड़ित परिजनों को पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की भी सलाह दी।
घटना ने निजी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब मांग उठ रही है कि अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराए जाएं और पुलिस वायरल वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर निष्पक्ष जांच करे। साथ ही नवजात बच्ची की गंभीर हालत की चिकित्सकीय जांच भी कराई जाए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस अस्पताल में एक महिला मां बनने के लिए पहुंचती है, यदि वहीं उसकी सुरक्षा खतरे में पड़ जाए तो आम आदमी भरोसा किस पर करे? बिल का विवाद कानूनी प्रक्रिया से सुलझाया जा सकता है, मारपीट से नहीं।
-- मनीष मिश्रा