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Birth centenary logo of ashok singhal released

अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी का लोगो जारी
16 September 2026 by
thenewsagency


नई दिल्ली, सितंबर 16 (TNA) अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर उनके जीवन, कार्यों और सांस्कृतिक योगदान को स्मरण करने के लिए विशेष लोगो तैयार किया गया है। इसे जारी करते हुए विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महा-मंत्री बजरंग लाल बागड़ा ने कहा यह लोगो उनके आध्यात्मिक संस्कारों, हिंदू समाज के गौरव-जागरण तथा भारतीय संस्कृति के प्रति आजीवन समर्पण को अभिव्यक्त करता है।

उन्होंने कहा कि लोगो में अंकित “श्रद्धेय अशोक सिंघल” नाम श्रद्धा और सम्मान का भाव प्रकट करता है, जबकि “जन्म शताब्दी वर्ष 1926–2015” उनके जीवन-काल को रेखांकित करता है। 27 सितंबर 2026 को उनके जन्म के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जारी यह लोगो उनके विचारों, संकल्पों और कार्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम बनेगा।

लोगो की भगवा–केसरिया पृष्ठभूमि त्याग, तपस्या, आध्यात्मिक चेतना, शौर्य और राष्ट्रधर्म के प्रति समर्पण का प्रतीक है। चारों ओर बना स्वर्णिम वलय भारतीय ज्ञान-परंपरा की शाश्वतता, गौरव और प्रकाश को दर्शाता है। लोगो में अंकित श्रीराम मंदिर श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के जीवन के एक बड़े ध्येय तथा श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में उनके ऐतिहासिक योगदान का प्रतीक है। मंदिर के साथ लहराता भगवा ध्वज सनातन परंपरा, संगठन, त्याग और सांस्कृतिक स्वाभिमान का भाव प्रकट करता है।

विहिप महामंत्री ने कहा कि लोगो के केंद्र में स्थित अशोक सिंघल का शांत, तेजस्वी और सौम्य व्यक्तित्व उनके आध्यात्मिक संस्कार, दृढ़ संकल्प, संगठन-कौशल तथा पूज्य संतों के प्रति श्रद्धा और हिंदू समाज के प्रति उनकी आत्मीयता को दर्शाता है। उनका तिलक और श्वेत वस्त्र सादगी, आध्यात्मिक आस्था और भारतीय जीवन-मूल्यों के प्रति निष्ठा का प्रतीक है। नाम को उभारता गहरा लाल–मरून पट्ट ऊर्जा, साहस, संकल्प और संघर्षशीलता का भाव व्यक्त करता है, जबकि नीचे का पीताभ–स्वर्णिम आधार ज्ञान, प्रकाश, मंगल और भविष्य के प्रति आशा का संदेश देता है।

बागड़ा ने बताया कि यह लोगो केवल एक दृश्य-चिह्न नहीं, बल्कि अशोक सिंघल के जीवन-संदेश का प्रतीकात्मक संकलन है। उनका जीवन भारतीय संस्कृति, हिंदू समाज के संगठन, पूज्य संतों के प्रति श्रद्धा तथा सांस्कृतिक स्वाभिमान के लिए समर्पित रहा। जन्म शताब्दी वर्ष उनके योगदान के स्मरण के साथ-साथ सेवा, संगठन, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना के नए संकल्पों को आगे बढ़ाने का अवसर है।

विश्व हिन्दू परिषद समेत सम्पूर्ण विश्व के लोग जन्म शताब्दी वर्ष के दौरान इस लोगो का उपयोग विभिन्न कार्यक्रमों, प्रकाशनों, डिजिटल माध्यमों, स्मृति अभियानों और जनसंपर्क गतिविधियों में किया जाएगा। यह लोगो श्रद्धेय अशोक जी के प्रति कृतज्ञ श्रद्धांजलि तथा उनके विचारों और संकल्पों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा का प्रतीक बनेगा।


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