लखनऊ, अगस्त 30 (TNA) उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस का अदना कार्यकर्ता और देश की जनता भी जानती है कि पार्टी की असली ताक़त आज भी गांधी परिवार के पास है। मल्लिकार्जुन खरगे को राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाकर कांग्रेस दलित नेतृत्व के सम्मान का दावा जरूर करती है, लेकिन व्यवहार में उन्हें स्वतंत्र राजनीतिक अधिकार और निर्णय की ताक़त देने से परहेज करती है। खरगे को केवल सजावटी और बनावटी अध्यक्ष बनाकर रखना न केवल एक वरिष्ठ दलित नेता का अपमान है, बल्कि उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और योग्यता का भी अनादर है।
मौर्य ने कहा कि राहुल गांधी हल्द्वानी में खरगे के कार्यक्रम को लेकर ‘शुद्धीकरण’ और दलितों से भेदभाव जैसे निराधार आरोप लगाकर सामाजिक न्याय की राजनीति नहीं कर रहे हैं, बल्कि समाज के बीच अविश्वास पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। देवभूमि उत्तराखंड को कठघरे में खड़ा करने से पहले राहुल गांधी को अपनी ही पार्टी के भीतर झांकना चाहिए और बताना चाहिए कि कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के बावजूद खरगे के पास पार्टी की वास्तविक निर्णयकारी शक्ति कितनी है?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि वह मंच से दलित सम्मान की दुहाई देती है, लेकिन पार्टी की सत्ता संरचना गांधी परिवार की चौखट से बाहर नहीं निकलने देती। कांग्रेस में दलित नेता अध्यक्ष तो बन सकता है, लेकिन सत्ता की असली चाबी गांधी परिवार से बाहर नहीं जा सकती। सामाजिक न्याय भाषणों से नहीं, अधिकार और अवसर देने से सिद्ध होता है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि खरगे देश के सबसे अनुभवी कांग्रेस नेताओं में हैं और कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। यदि गांधी परिवार दलित नेतृत्व के प्रति अपने दावों को वास्तव में प्रमाणित करना चाहता है, तो उसे बताना चाहिए कि इतने लंबे अनुभव और राजनीतिक वरिष्ठता के बावजूद खरगे जी को निर्णायक भूमिकाओं में आगे बढ़ाने के प्रश्न पर परिवार की राजनीति क्यों आड़े आती रही है। दलित सम्मान को राजनीतिक नारे की तरह इस्तेमाल करना और वास्तविक सत्ता को एक परिवार तक सीमित रखना कांग्रेस का दोहरा चरित्र है।
मौर्य ने आगे कहा कि कांग्रेस को दलितों और पिछड़ों की याद तब अधिक आने लगी, जब अति पिछड़े समाज से निकलकर नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने और उन्होंने अपनी कार्यशैली से यह साबित किया कि साधारण परिवार से आया व्यक्ति भी देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक नेतृत्व तक पहुंच सकता है। प्रधानमंत्री मोदी के उदय ने परिवारवाद की उस राजनीति को सीधी चुनौती दी, जिसमें सत्ता और नेतृत्व को कुछ चुनिंदा परिवारों की विरासत समझ लिया गया था।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सकारात्मक राजनीति के माध्यम से दलित, पिछड़े, गरीब और वंचित समाज को केवल नारों में नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं में स्थान दिया है। गरीब कल्याण, सामाजिक सशक्तीकरण और अवसरों के विस्तार के माध्यम से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य हुआ है। यही सामाजिक न्याय का वास्तविक मॉडल है: सम्मान भी, अवसर भी और भागीदारी भी।
अंत में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी को समाज को बांटने वाले आरोप लगाने से पहले अपनी पार्टी के भीतर सामाजिक न्याय की कसौटी लागू करनी चाहिए। देश अब दिखावटी दलित प्रेम और परिवारवादी राजनीति के अंतर को समझता है। जनता झूठे आरोपों और विभाजनकारी राजनीति के बजाय सम्मान, सुशासन, समान अवसर और विकसित भारत के संकल्प को प्राथमिकता दे रही है।