लखनऊ, सितंबर 23 (TNA) किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के क्वीन मैरी हॉस्पिटल की इन्फर्टिलिटी/IVF यूनिट ने कोविड काल के बाद पहली सफल IVF गर्भावस्था के सुखद परिणाम के रूप में एक दंपति के घर खुशियां पहुंचाई हैं। 20 सितंबर 2026 को 38 वर्षीय महिला ने सीज़ेरियन सेक्शन के माध्यम से स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। नवजात का वजन दो किलोग्राम है। जन्म के तुरंत बाद बच्ची के रोने से उसके स्वस्थ होने का संकेत मिला। मां और नवजात दोनों की स्थिति संतोषजनक है।
महिला पिछले करीब 15 वर्षों से निःसंतानता की समस्या से जूझ रही थी। संतान प्राप्ति के लिए उन्होंने कई चिकित्सकों से परामर्श और विभिन्न उपचार कराए, लेकिन सफलता नहीं मिली। करीब एक वर्ष पहले उन्होंने क्वीन मैरी हॉस्पिटल की इन्फर्टिलिटी/IVF यूनिट में प्रो. पुष्पलता शंखवार, यूनिट हेड, से संपर्क किया। विस्तृत जांच के बाद आवश्यक उपचार और IVF प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें गर्भधारण हुआ। गर्भावस्था के दौरान नियमित चिकित्सकीय निगरानी और फॉलो-अप किए गए ।
पूरा IVF उपचार प्रो. पुष्पलता शंखवार के निर्देशन एवं पर्यवेक्षण में उनकी टीम ने किया। इस उपलब्धि पर विभागाध्यक्ष प्रो. अंजू अग्रवाल ने कहा कि यह क्वीन मैरी हॉस्पिटल और पूरे विभाग के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने बताया कि कोविड से पहले भी अस्पताल में IVF के माध्यम से गर्भधारण के सफल मामले सामने आए थे, लेकिन कोविड काल में यह सुविधा बंद हो गई थी। अब इन्फर्टिलिटी यूनिट में निःसंतान दंपतियों को आधुनिक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि यूनिट में IVF के साथ ICSI और TESE जैसी आधुनिक सहायक प्रजनन तकनीकों के माध्यम से भी उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से निःसंतानता से जूझ रहे दंपतियों के लिए आधुनिक उपचार नई आशा प्रदान कर सकता है। उचित जांच, व्यक्तिगत उपचार योजना और विशेषज्ञों की समन्वित देखभाल से कई दंपतियों को संतान प्राप्ति का अवसर मिल सकता है।
मालूम हो, विभाग में ivf यूनिट की शुरुआत 1993 में डॉ लक्ष्मी सिंह द्वारा की गई थी, कम संसाधन और शासकीय झमेले में प्रगति में आड़े आते रहें, पूर्व hod dr विनीता दास ने भी यूनिट को आगे बढ़ाया, मगर covid महामारी के बाद से यूनिट बंद जैसी हो गई थी , पुनः सफलता मिलने से आशाओं का उदय हुआ है ।