श्री नैमिषारणय में विश्व कल्याण के लिए महायज्ञ शुरू !

उतर प्रदेश के सीतापुर जनपद में स्थित पावन तपोभूमि नैमिषारणय में एक नवम्बर से अखिल विश्व के कल्याण एवं पितरों को मोक्ष प्रदान करने की कामनाओं को पूण॔ करने हेतु 88000 हजार ऋषी मुनियों व 33 कोटि देवताओं की तपोभूमि पर 88 हजार श्रेष्ठ आचार्यों व यजमानों के साथ आलौकिक दिव्य विभूतियों की सानिध्य में लगभग 1अरब 97 करोड़ 29 लाख 49 वर्षों के बाद जन कल्याण हेतु आयोजित किया जा रहा है ।

इस महायज्ञ का भव्य आयोजन प्रख्यात कथा वाचक एवं यज्ञ संकल्पी श्री व्यास पीठाधीश अनिल कुमार शास्त्री द्वारा किया जा रहा है । इस यज्ञ का समापन 10 नवम्बर 2019 को होगा ।
श्री नैमिषारणय विश्व के अनेक सुप्रसिद्ध तीर्थो में से है । सतयुग का महान प्राचीन नैमिषारणय क्षेत्र है इस क्षेत्र की स्थापना स्रृष्टि के प्रारम्भ में स्वयं ब्रम्हा,विष्णु,महेश ने की थी । युगों की श्रंखला में सर्वप्रथम सतयुग और तीर्थो में श्री नैमिषारणय क्षेत्र का निर्माण किया गया था, विश्व के आठ आरण्यों में अष्टम अरण्य तथा आठ बैकुण्ठों में अष्टम बैकुण्ठ श्री नैमिषारणय क्षेत्र माना जाता है ।

पुरातन काल में जब मानव पर कोई विपत्ति आती थी या राष्ट्रों को कोई भी विचार-विनिमय करना होता था तब इसी भूमि पर ऋषि-मुनि एकत्रित होकर धर्म संसद चलाकर राष्ट्रों के निण॔य किया करते थे । 88 हजार ऋषि-मुनियों की राजधानी एवं भारतीय सनातन संस्कृति का उदगम स्थल श्री नैमिषारणय क्षेत्र अनादिकाल से ऋषि-मुनियों की तपस्या का केन्द्र रहा है ।

भगवान श्री वेद व्यास जी ने इसी धरती पर चार वेद छः शास्त्र तथा अठारह पुराणों की रचना करके अक्षयवट की छाया में परम शिष्य महर्षि जैमिनी को सामवेद की शिक्षा दी थी तथा कलयुग में में प्रत्येक मानव के कल्याण का सबसे सरल साधन श्री सत्यनारायण व्रत कथा का माहात्य एवं पूजा का विधान बताया था । श्री नैमिषारणय में ही महर्षि दधीचि ने लोक कल्याण हेतु अपनी हड़डियों का भी दान दे दिया था ।

यहाँ पर एक रात्रि भी निवास करने वाले की वन्दना करते हुए स्वयं देवता कहते हैं । “धंयास्तु मानवाॅललोके नैमिषे निवसंति ये” । इसी लिए यह भूमि सभी प्रकार के फलों को प्रदान करने वाली है । इस भूमि पर किया गया प्रत्येक कर्म अक्षय हो जाता है इसका वर्णन अवण॔नीय है ।

यज्ञ के प्रारम्भ के पहले दिन उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, मंत्री सूर्य प्रताप शाही सहित सैकड़ों गणमान्य लोग पधार कर श्री व्यास पीठाधीश अनिल कुमार शास्त्री द्वारा आयोजित 88 हजार श्रीमद भागवत पारायण महायज्ञ में उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पहुंचे थे । सूत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है कि 10 नवम्बर के पूर्व उक्त महायज्ञ में शामिल होने के लिए लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की पहुंचने की संभावना है।

— नरेश दीक्षित

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