…लेकिन मीडिया के सुशांत कुढ़-कुढ़ के जी लेते हैं

न्यूज़ चैंनलों की लफ्फाज़ी और अख़बारों का गंभीर संपादकीय पक्ष भी एक जैसा था। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की वजह को सबने एक नज़रिये से देखा। लॉबीबाज़ी, चाटूकारिता,कुनबेबाज़ी,जातिवाद,समझौतावाद जैसे किसी सांचे में ख़ुद को फिट कर लेते तो सुशांत को अपने ढलते कैरियर के सदमें में आत्महत्या करने पर मजबूर नहीं होना पड़ता। […]