बड़े-बड़े बाबाओं को खा गया मीडिया ट्रायल, इस बाबा को सूंघ नहीं पायेगा !

मोदी सरकार ने राजधर्म निभाने के लिए रिश्तों को किनारे कर दिया लेकिन मीडिया व्यवसायिक मजबूरियों को भुलाकर पत्रकारिता का धर्म निभाती है या नहीं, ये देखना दिलचस्प होगा।

फिलहाल तो राजा हरिश्चंद्र उर्फ एनडीटीवी (एनडीटीवी पर अटूट विश्वास करने वाले कुछ दर्शक इसे हरिश्चंद्र टीवी भी कहते हैं।) जो सरकार और सरकार के समर्थकों की खामियों को ख़ूब उजागर करता है, उसने भी रामदेव की कोरोना दवा को कुरेदना मुनासिब नहीं समझा। इस सम्बंध में अभी तक विज्ञप्ति छाप खबरें ही चल रहीं है।

क्योंकि कोई भी न्यूज चैनल गहराई में जाकर खबर निकालने की कोशिश करेगा तो वो चैनल गहरे गड्ढे में गिर जायेगा। वजह ये है कि देश के बड़े न्यूज चैनलों की बड़ी प्रायोजक कंपनी है पतांजलि। लगभग सभी चैनलों के प्राइम टाइम को रामदेव की कंपनी प्रायोजित करती है। सब जानते है कि देश के बड़े पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेई ने रामदेव से खरा सवाल पूछ लिया था तो आजतक ने वाजपेई को बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

भाजपा के सबसे बड़े भक्त रामदेव की कोरोना दवा को सरकार ने ही संशय की नजर से देखा, इसके प्रचार पर रोक लगा दी। इससे पहले भी बाबा की तरक्की के आसमान पर खतरों, शिकायतों और नकारात्मकता के बादल आये पर मीडिया ने इसे अनदेखा कर दिया। इस तरह की अनिमितताओं, शिकायतों, संशयों पर कभी भी मीडिया ट्रायल या इनवेस्टीगेशन वाली रिपोर्टिंग नहीं हुई।

दुनिया जानती है कि योगगुरु और पतांजलि कंपनी के मालिक सरकार के कितने करीबी हैं, फिर भी सरकार ने कोरोना की दवा का दावा करने वाली रामदेव की लॉचिंग को ही किरकिरा कर दिया। बाबा रामदेव से प्रधानमंत्री के दोस्ताना सम्बंध है, भाजपा को सत्ता दिलाने के लिए बाबा ने कांग्रेस को शीर्षासन करा दिया था। फिर भी दोस्ताना अपनी जगह है और देश की जनता के स्वाथ्य को लेकर सरकार की सजगता, नियम-कानून और सख्त निगरानी अपनी जगह हैं।

बाबा रामदेव लोगों की जिन्दगी से खेलकर कोविड जैसी गंभीर बीमारी को भी भुनाना चाहता हैं। उन्होंनें कोरोना की दवाई के नाम पर जनता की जिन्दगी से जो खिड़वाल करने की कोशिश की उसके खिलाफ मोदी सरकार तत्काल एक्शन मे आयी।

कोरोना की दवा के दावे वाली रामदेव की पतांजलि की दवा और उसके भ्रामक प्रचार पर सरकार ने रोक लगा दी। जबकि रामदेव ना सिर्फ मोदी सरकार के बड़े भक्त हैं बल्कि उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा का खूब प्रचार भी किया था। गौरतलब है कि करीब आठ साल पहले बाबा रामदेव ने काला धन के खिलाफ बड़ा आंदोलन कर कांग्रेस सरकार के खिलाफ मुहिम छेड़ कर भाजपा की जमीन तैयार करने के हर संभव प्रयास किये थे। और इस तरह से वो भाजपा को सत्ता दिलाने की मुहिम में सफल भी हुए थे। फिर भी सरकार ने अपने महाभक्त या महासमर्थक को नियम कानूनों से बढ़ कर नहीं समझा।

पतंजलि ने बीते मंगलवार दावा किया था कि उन्होंने कोरोना से ठीक होने वाली एक दवा की एजात कर ली है। इसके बाद आयुष मंत्रालय ने मीडिया की खबर के आधार पर इस मामले में नियमानुसार अपनी टांग फसा दी। मंत्रालय ने चिट्ठी जारी करते हुए कहा कि कंपनी की तरफ से जो दावा किया गया है उसके फैक्ट और साइंटिफिक स्टडी को लेकर मंत्रालय के पास कोई इम्फोरमेश नहीं आयी है।

इसके जवाब में पंतजलि के मालिक रामदेव ने चौकाने वाला तर्क दिया। योगगुरु ने कहा कि हमने इजाज़त लेकर ही क्लीनिकल ट्रायल किया था। अब लोग कह रहे हैं कि इस मामले में सरकार ने संबधों के आगे राजधर्म के साथ कोई भी समझौता नहीं किया। लेकिन मीडिमा की निष्पक्षता इस मामले में डावांडोल नजर आ रही है।

अब आप एनडीटीवी के चरित्र पर आइये। पत्रकारिता का दायित्व निभाते हुए एनडीटीवी सरकार की हर ख़ामी, नाकामी और गलत फैसलों के खिलाफ खूब खबरें दिखाता है। लेकिन रामदेव के इस गैर जिम्मेदाराना दावे पर अंकुश लगाते हुए सरकार का आयुष्य मंत्रालय सामने आ गया लेकिन एनडीटीवी सहित तमाम चैंनलों ने योगगुरु पर सवाल नहीं उठाये।

क्योंकि अन्य बड़े चैनलों की तरह बाबा की पतांजलि कंपनी का विज्ञापन पैकेज एनडीटीवी को हासिल है। बताया जाता है कि इस कोरोना की दवा के प्रचार का विज्ञापन पैकेज का रिलीज आर्डर भी मीडिया को मिल गया था।

मीडिया के लोग वाकिफ हैं, आर. गंगाजल जैसा होता है इससे धन्नासेठ बाबाओं, व्यवसायिक कंपनियों, पार्टियों और सरकारों के सारे के सारे पाप धुल जाते हैं।

– नवेद शिकोह/लखनऊ 
8090180256

(लेखक लखनऊ के जाने माने पत्रकार हैं जो अपनी बेबाक़ कलम के लिए जाने जाते हैं । ये लेख उनकी निजी राय है)

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