Skip to Content

UP Chief Minister inaugurates the fifth edition of the Gomti Book Festival in Lucknow

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोमती पुस्तक मेले के पांचवें संस्करण का किया उद्घाटन, कहा पुस्तकें समाज को जोड़ने का कार्य करती हैं
12 सितंबर 2026 द्वारा
thenewsagency


लखनऊ, सितंबर 12 (TNA) “हम सबकी चिंता रहती थी कि डिजिटल युग में युवा पुस्तकों से दूर होकर सोशल मीडिया पर अपना समय खराब कर रहा है। लेकिन राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के गोमती पुस्तक मेले के पांचवें संस्करण ने यह साबित कर दिया है कि आज का युवा पुस्तकें पढ़ता है। आज का युवा सोशल मीडिया पर केवल समय खराब नहीं करता, बल्कि चारों तरफ की चीजों को देखता, समझता और अपने ज्ञान का संचयन कर भविष्य का निर्माण करता है।” यह विचार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोमती पुस्तक मेला, 2026 के पांचवें संस्करण के उद्घाटन अवसर पर व्यक्त किए।

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा कि इस गोमती पुस्तक मेले के माध्यम से हजारों छात्रों, युवाओं को एक मंच मिलेगा। आप पुस्तकें खरीद सकते हैं। यहां कई ऐसे कार्यक्रम होंगे जो आपके मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञानवर्धन करेंगे। भारतीय परंपरा सदैव ज्ञानोभद्रा यानी ज्ञान की आने के लिए चारों द्वार खुले रखने चाहिए। पुस्तकें केवल पाठ्यक्रम में पारंगत नहीं बनाती हैं बल्कि ज्ञान को आगे बढ़ाने का माध्यम हैं। ये दुनिया को समझने के लिए आपको पुस्तकों की गहराई में जाना पड़ेगा। प्रधानमंत्री की पुस्तक एग्जाम वॉरियर्स बच्चों को भेंट की।

यह पुस्तक युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन करती है। ज्ञान की सीमित दायरे में न देखें। लखनऊ का साहित्य से पुराना नाता रहा है। भारत की वैदिक परंपरा को समझने की स्थली नैमिषारण्य यहां है। यह आयोजन महोत्सव नहीं बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने और चिंतन को समझने का समय है। इस डिजिटल युग में हमने गांव और शहर की दूरी को कम किया है। प्रदेश के पुस्तकालयों में NBT की पुस्तकें भेजी जा रही हैं।  उन्होंने बच्चों, युवाओं से बुक बैंक बनवाने का आह्वान किया। खाली समय में पुस्तकें पढ़िए, कोई मंजिल कठिन नहीं है, अपनी राह आपको खुद तैयार करनी है। यहां पुस्तक मेले में आप सबके लिए कुछ न कुछ है, यह पुस्तक मेला खरीदने तक सीमित नहीं बल्कि व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने का काम करें।

लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रांगण में आयोजित गोमती साहित्योत्सव का शुभारंभ उत्साहपूर्ण एवं साहित्यिक वातावरण में हुआ। कार्यक्रम में पुस्तक, साहित्य, भाषा और पठन-संस्कृति से जुड़े अनेक गणमान्य अतिथि, लेखक, साहित्यकार, प्रकाशक, शिक्षाविद् तथा पुस्तक-प्रेमी उपस्थित रहे। इस अवसर पर वक्ताओं ने पुस्तकों की समाज निर्माण में भूमिका तथा नई पीढ़ी को पठन-संस्कृति से जोड़ने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

उद्घाटन सत्र में अतिथियों का स्वागत करते हुए राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे ने कहा कि यह गौरव का विषय है कि गोमती पुस्तक मेला अपने पांचवें संस्करण में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि यह भी एक विशिष्ट संयोग है कि जीवनदायिनी गोमती नदी के तट पर पुस्तक मेले का आयोजन हो रहा है। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों का आह्वान किया कि विकसित भारत के साथ अब “विकसित वाचक” की दिशा में भी आगे बढ़ें।

बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय के इस प्रांगण में गोमती साहित्योत्सव के रूप में एक ऐतिहासिक आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेले के माध्यम से नई पीढ़ी को पुस्तकों और साहित्य से जोड़ने की यह एक सार्थक पहल है।

माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि समय अत्यंत मूल्यवान होता है। जीवन में बहुत-सी चीजें दोबारा प्राप्त की जा सकती हैं, लेकिन पढ़ने के लिए मिला समय वापस नहीं आता। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने एक-एक पल का सदुपयोग करते हुए जीवन को सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कर्म के प्रति सजगता और समर्पण को सफलता का आधार बताया।

उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा राज्य मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की पहल की सराहना करते हुए कहा कि एनबीटी बच्चों और युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने आचार्य रामचंद्र शुक्ल के कथन “साहित्य ज्ञानराशि के संचित कोश है” का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य नए समाज के निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम है। पुस्तकें हमारी सबसे अच्छी मित्र हैं और इस प्रकार के आयोजन समाज के विभिन्न वर्गों को एक-दूसरे के निकट लाने का सुनहरा अवसर प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT) तथा पुस्तक मेले से जुड़े आयोजकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेले पाठकों को विभिन्न विषयों की पुस्तकों, नए लेखकों और प्रकाशनों से परिचित कराने के साथ-साथ पढ़ने की आदत को विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को पुस्तकों से जोड़ना ऐसे आयोजनों का प्रमुख उद्देश्य है।

वक्ताओं ने यह भी कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने, संवेदनशीलता विकसित करने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने लोगों से नियमित रूप से पुस्तकें पढ़ने तथा अपने आसपास सकारात्मक पठन-वातावरण विकसित करने का आह्वान किया।

इससे पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गुलाब देवी, संदीप सिंह, प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे एवं युवराज मलिक ने फीता काटकर पुस्तक मेले का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर बच्चों को पुस्तकें भेंट की गईं तथा अतिथियों ने पुस्तक मेले में लगी विभिन्न पुस्तक-प्रदर्शनियों और स्टॉलों का अवलोकन किया। मेले में साहित्य, इतिहास, संस्कृति, शिक्षा, बाल साहित्य तथा ज्ञान-विज्ञान सहित विभिन्न विषयों की पुस्तकें पाठकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। पाठकों के लिए अपनी रुचि के अनुरूप पुस्तकों को देखने, समझने और चयन करने का विशेष अवसर उपलब्ध कराया गया है।

कार्यक्रम के दौरान गोमती साहित्योत्सव की आगामी गतिविधियों और साहित्यिक आयोजनों की जानकारी भी दी गई। इस दौरान लेखकों से संवाद, साहित्यिक चर्चाओं तथा पाठकों के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, लेखकों, प्रकाशकों, शिक्षाविदों तथा पुस्तक-प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उद्घाटन सत्र ने स्पष्ट संदेश दिया कि पुस्तकें केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि व्यक्ति और समाज को बेहतर बनाने का सशक्त साधन भी हैं।


इस पोस्ट को साझा करें
टैग्स 


संग्रहित करें