नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: उनका अचानक हवा में हाथ फैलाना और दूर कानपुर में एक बच्चे का छत से गिरना और बच जाना

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: उनका अचानक हवा में हाथ फैलाना और दूर कानपुर में एक बच्चे का छत से गिरना और बच जाना

बजरंग गढ़ में भक्तों के बीच बैठे महाराज जी सहसा अपने हाथ फैलाते हुए (ऊपर से गिरती किसी चीज को पकड़ने की मुद्रा में) बोल। उठे, "ले, बच गया ।" महाराज जी के इस विचित्र से लगने वाले - आचरण पर एकत्रित भक्त समाज हँसने लगा बिना कुछ समझे महाराज जी भी हँसने लगे । (पर कौन समझ पाया है कभी भी महाराज । जी की ऐसी लीलाओं में निहित तथ्य और सत्य ।)

तब तीसरे दिन कानपुर से आई एक कृतज्ञ महिला ने महाराज जी को प्रणाम करते हुए कहा, "महाराज, मेरा पाँच वर्ष का बच्चा छत से गिर गया था । मैं तब चीख उठी, महाराज और तभी मकान के नीचे से गुजरते हुए एक आदमी ने ऐसे (अपने हाथ उसी तरह फैलाये हुए जैसे महाराज जी ने फैलाये थे) हाथ फैलाकर मेरे बच्चे को अपनी गोद में थाम लिया !! बच गया महाराज जी आपकी कृपा से। भक्तों की समझ में तब आ पाया महाराज जी के हाथ फैलाने का रहस्य । (पूरनदा)

(अनंत कथामृत के सम्पादित अंश)

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