नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: जब कुंवर रानी को खिलाया गया ज़्यादा प्रसाद और वो हो गयीं स्वस्थ

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: जब कुंवर रानी को खिलाया गया ज़्यादा प्रसाद और वो हो गयीं स्वस्थ

सदा ही सूक्ष्माहार वाली कुंवरानी प्रमिला ज्योतिप्रसाद (शाहजहानपुर स्टेट) जब महाराज जी के दर्शन को आईं तो उनके सामने पूरा भरपूर भोजन का थाल रखकर महाराज जी बोले, “खाले !” तब उस भोजन की मात्रा देखकर वे अचकचा गईं और बोलीं, “महाराज ! मैं इतना सब थोड़े खा सकूंगी ।”

परन्तु बाबा जी अपनी बात पर अड़ गये “नहीं खा । सब खा लेगी ।" मजबूर होकर कुंवरानी साहिबा धीरे धीरे पूरा थाल भोजन प्राप्त कर गईं !! (यही सोचते कि अब वे अवश्य बीमार पड़ेंगी ।)

परन्तु उन्हें उतनी मात्रा में प्रसाद पा लेने पर भी कुछ न हुआ !! अपितु वे तो अपने को और अधिक स्वस्थ महसूस करने लगीं । किसने दे दी उन्हें वह क्षमता उस मात्रा का भोजन प्रसाद भस्म कर लेने की ?

बाबा जी के इस प्रसाद ने वर्षों उपरान्त अपना सुफल देना प्रारम्भ कर दिया। कुंवरानी साहिबा आठवें दशक में श्री माँ के सत्संग में धीरे धीरे महाराज जी के प्रति अधिकाधिक समर्पित होने लगीं। और आज तो वे पिछले ४-५ वर्षों से बाबा जी के आश्रमों (विशेषकर कैंची धाम, वृन्दावन, ऋषीकेश तथा बीरापुरम) का श्री माँ की छत्रछाया में अभिन्न अंग बन चुकी हैं । (१६६४)

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