नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: जा कुछ नहीं हुआ, आग बुझ गई है!

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: जा कुछ नहीं हुआ, आग बुझ गई है!

मंदिर तथा उसके आगे कच्चे प्रांगण में पक्का चबूतरा बनने की बात उठी तो बाबा जी ने गाँव के एक समृद्ध वैश्य से ईंट और सीमेंट के लिये कहा इस हेतु । उस समय तो वैश्य महाशय ने हामी भर दी पर बाद में मुकर गये

अब प्रारम्भ हुआ बाबा जी का कौतुक । वैश्य की दुकान में भीषण आग लग गई । धुँआ ही धुँआ चारों ओर । और कोई उपाय न देख वैश्य दौड़ा-दौड़ा बाबाजी के चरणों में आ गिरा कि बचाओ ।

महाराज जी ने उसके किये गये वादे का उसे स्मरण कराया और कहा, "हनुमान जी रुष्ट हो गये हैं तुझसे,” तो वह रोने लगा । तब दया-निधान ने कमण्डल से कुछ जल हाथ में लेकर वैश्य की दुकान की तरफ छींटे फेंके और कहा, “जा कुछ नहीं हुआ, आग बुझ गई है ।”

दूर से फेंके जल के उन चन्द छींटों से ही वह आग बुझ गई और पता चला कि दुकान में केवल कुछ मिर्चे ही जली थीं !! परन्तु इसके बाद हनुमान मंदिर तथा चबूतरा शीघ्र ही पक्का हो गया ।

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