नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: बाबा महाराज की मनसा

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: बाबा महाराज की मनसा

पूर्व में कहा जा चुका है कि जाने के पूर्व बाबा महाराज ने कैंचीधाम में अर्ध निर्मित यज्ञ-शाला को स्थायी रूप-स्वरूप देने हेतु बहुत हलचल मचाई थो । स्पष्ट था कि वे धाम में यज्ञों की निरन्तर सम्पन्नता के इच्छुक थे। इस हेतु उन्होंने पूर्व में ही शरत-कालीन नवरातों के मध्य यज्ञों की सम्पन्नता के लिये श्री सर्वदमन सिंह रघुवंशी (श्री इन्दर जी) को मनोनीत करते हुए कहा था “इन्दर करेगा (यह यज्ञ) । "

अस्तु, वर्ष १६७३ में बाबा महाराज की वृन्दावन में तथाकथित तेरहवीं के उपरान्त श्री माँ, जीवन्ती माँ, दादा मुखर्जी, उनकी पत्नी तथा इन्दर बाबू (सपत्नीक) कैंचीधाम आ गये । बाबा महाराज की शरीर लीला के बाद की यह प्रथम नवरात्रि थी और उस नव निर्मित यज्ञ-शाला में प्रथम उत्सव । एक ओर जहाँ सबके मन भरे हुए थे बाबा जी के विछोह में, वहीं उनकी इच्छाओं-आज्ञाओं के पालन का भी प्रश्न था ।

अतएव श्री सर्वदमन सिंह जी (सपत्नीक) एवं दादा (सपत्नीक) ने इस नवरात्रि के पूजन-यज्ञ को सम्पन्न किया । साथ में मुझे और श्री देवकामता दीक्षित जी के पुत्र, महेश को भी इस यज्ञ में शामिल किया गया । तब से हर वर्ष इसी प्रकार सर्वदमन जी इस पूजा-यज्ञ को सम्पन्न करते आ रहे हैं । (केवल दो-एक वर्ष ही वे अपनी कुछ पारिवारिक असमंजसों के कारण बीच में न आ सके थे ।) आज इस महान यज्ञ में सैकड़ों की संख्या में बड़े उत्साह से भक्त समाज सम्मिलित होता है । इसी यज्ञ-शाला में १५ जून के भण्डारे के पूर्व श्री भागवत सप्ताह की पूर्णाहुति का महायज्ञ भी १४ जून को सम्पन्न होता है जिसमें उपस्थित एवं आगन्तुक भक्त समाज भारी संख्या में सम्मिलित होता है ।

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