नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: बच्चे भक्त के पिता के प्रति प्रेम देख प्रफुल्लित हुए

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: बच्चे भक्त के पिता के प्रति प्रेम देख प्रफुल्लित हुए

वर्ष १९७३, जून माह की १६ तारीख । कैंची में राम-कुटी भरी हुई थी भक्तों से । मैं पहुँचा तो दरवाजे पर ही खड़ा रहना पड़ा । बाबा जी बन्द लिफाफों में कुछ बाँट रहे थे उपस्थित भक्तों को । उन दिनों अमेरिकन भक्तों द्वारा बाबा जी महाराज की फोटो-छवियाँ जब-तब बाँटी जाती थीं । स्वाभाविक था कि मैंने सोचा कि ये भी फोटो-छवियाँ होंगी ।

कमरे के दूसरे कोने में खड़े मेरे छोटे पुत्र, तप्पन को भी एक लिफाफा दे दिया बाबा जी ने जिसे उसने तत्काल खोल कर देख लिया। तभी बाबा जी ने उससे कहा, "अपने बाप को मत बताना (इसमें क्या है), बतायेगा ?" तप्पन ने कहा, "हाँ, बताऊँगा ।" "कैसा लड़का है? हम कह रहे हैं मत बताना । कहता है बताऊँगा । बोल, बतायेगा ?” “हाँ, बताऊँगा ।”

अब तो जनता भी तप्पन का मुँह देखने लगी कि वाकई में कैसा ढीठ लड़का है । और इधर मैं सोच रहा था कि अगर मुझे तप्पन फोटो-छवि के बारे में बता भी देगा तो क्या गुनाह करेगा ? पर तभी बाबा जी पुनः अधिक तेज आवाज में बोल उठे, "मत बताना । इसमें सर्प है । बतायेगा ?” तप्पन फिर बोल उठा, "हाँ, बताऊँगा ।" इस पर बाबा जी बहुत प्रसन्न हो बोले, “अपने बाप से कुछ नहीं छिपायेगा ।"

तब तक मेरी जिज्ञासा ने दूसरा मोड़ ले लिया कि आखिर है क्या लिफाफे में ? भीड़ को आज्ञा हुई, अब जाओ ।” लड़का बाहर आया तो मैंने उससे कहा, “दिखा तो क्या है ?” उसने लिफाफा मेरी तरफ बढ़ा दिया । लिफाफ के भीतर ५१ सर्प थे !! ५१) रुपये !!

(आज यही सर्प ही तो सारे जगत को डसे हैं : मुकुन्दा)

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