स्मृति शेष : कामरेड चितरंजन सिंह को क्रांतिकारी लाल सलाम

जन -अधिकारों के संधर्षों‌ में साथ देने के लिए सतत प्रतिबद्ध रहे जनकर्मी, लोक स्वातंत्र्य एवं मानवाधिकारों के अगुआ पैरोकार, पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष चितरंजन सिंह जी का लम्बी बीमारी के दौरान आज निधन हो गया।

मौजूदा विषम दौर में‌ चितरंजन जी का हमारे बीच से असमय जाना लोक स्वातंन्त्रय और मानवाधिकार आंदोलनों की अपूरणीय क्षति है। इसकी भरपायी सम्भव नहीं होगी।व्यक्तिगत रूप से और पीपुल्स मीडिया की तरफ से उन्हें हमारा लाल सलाम , जिसके गठन में उन्होंने साथ दिया था।

चितरंजन भाई ने उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह सरकार के दौरान पुलिस द्वारा निर्दोष लोगों को फर्जी मुठभेड़ में मारे जाने के खिलाफ हमारे अभियान, ‘ अगेंस्ट पॉलिसी ऑफ़ लिक्विडेशन ‘ में अग्रणी भूमिका निभाई थी। उनकी पहल पर ‘ उत्तर प्रदेश मानवाधिकार संयुक्त संघर्ष मोर्चा ‘ (मानस ) का गठन हुआ , जिसका दफ्तर लखनऊ कॉफी हाउस के उपर सी बी सिंह के सभा कक्ष में खोला गया था।

निसंदेह अद्भुत थे वे. सच है कि उनके व्यक्तित्व का विघटन भी हुआ जिसके निजी पारिवारिक कारण हम बहूतेरे जानते है. उन्होंने अपने विवाह पश्चात के परिवार के विघटन को खून के घूंट की तरह पी लिया था.शायद ही कभी उन्होंने इसकी सार्वजनिक चर्चा की हो .

चितरंजन भाई ने दिवंगत मानवाधिकार योद्धा एवं पत्रकार कुलदीप नायर और अन्य के साथ उस सेमीनार के लिए सड़क पर उतरने से गुरेज नहीं किया जिसकी उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान में आयोजन की अनुमति राज्य सरकार के इशारे पर अंतिम क्षणों में वापस ले ली गई थी।

इस लेख में संलग्न फाइल फोटो सड़क पर आयोजित उसी सेमीनार का है।

— चन्द्र प्रकाश झा

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